सऊदी अरब के युवराज के सत्ता के शिखर तक पहुंचने की दास्तान

MBS के नाम से मशहूर, सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान अपने बेहद रूढ़िवादी देश को बदल रहे हैं. उसे मॉर्डन और कुछ हद तक लिबरल दिखाने की कोशिश में लगे हैं. लेकिन, साथ ही साथ उन्होंने सऊदी अरब को यमन की जंग में भी फंसा दिया है.
उन्होंने महिला अधिकारों की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों, कई इस्लामिक धर्म गुरुओं और ब्लॉगर्स को क़ैद कर लिया है. सलमान पर इस बात का भी गहरा संदेह है कि साल भर पहले तुर्की के इस्तांबुल में सऊदी अरब के हुक्मरानों के आलोचक जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या उनके इशारे पर हुई थी.
सऊदी अरब के शहर जेद्दा में लाल सागर के ऊपर तेज़ सूरज चमक रहा था. हमारी गाड़ी राजमहल के दरवाज़े पर पहुंची, तो वहां खड़े सुरक्षाकर्मी किनारे हो गए और हमारी कार गेट के अंदर चली गई. हम सऊदी अरब के वली अहद यानी युवराज प्रिंस सलमान बिन अब्दुल्लाज़ीज़ से मिलने जा रहे थे. प्रिंस अब्दुल्लाज़ीज, देश के रक्षा मंत्री भी थे. ये बात सितंबर 2013 की है.

कई साल पहले, 2004 में प्रिंस सलमान अब्दुल्लाज़ीज़ जब सऊदी अरब की राजधानी रियाद के गवर्नर थे तब हथियारबंद लोगों ने हमारी बीबीसी की टीम पर गोलियों की बरसात कर दी थी. हमलावरों ने आयरलैंड के रहने वाले मेरे कैमरामैन साइमन कम्बर्स को मार डाल था और मुझे मरा समझ कर छोड़ गए थे.

ताया जाता है कि तब प्रिंस सलमान अब्दुल्लाज़ीज़ मुझसे मिलने अस्पताल भी आए थे. लेकिन मुझे उसकी कोई याद नहीं क्योंकि, तब मुझे छह गोलियां लगी थीं. और डॉक्टरों ने मुझे दवा देकर कोमा में रखा हुआ था. आज वो प्रिंस सलमान बिन अब्दुल्लाज़ीज़, सऊदी अरब के बादशाह हैं. उनकी सेहत ठीक नहीं है.

उस वक़्त यानी 2013 में भी मैंने ग़ौर किया था कि जब हम महल के शानदार मेहमानख़ाने में सजी-धजी कुर्सियों पर बैठे बात कर रहे थे, तो उन्होंने अपना हाथ टहलने वाली छड़ी पर टिकाया हुआ था.

प्रिंस सलमान धीरे-धीरे अंग्रेज़ी बोल रहे थे. वो अपनी गहरी आवाज़ में मुझे बता रहे थे कि उन्हें लंदन किस क़दर पसंद था. बोलते वक़्त प्रिंस सलमान अब्दुल्लाज़ीज़ का लंबा चेहरा अक्सर मुस्कुराहट से भर उठता था.

आज वो सऊदी अरब के बादशाह हैं. उन्होंने अपने जीवन में बहुत से बदलाव देखे हैं. वो पहले सऊदी अरब की राजधानी रियाद के पांच दशक तक गवर्नर रहे थे. एक दौर में रियाद दो लाख बाशिंदों वाला एक धूल भरा शहर था. लेकिन प्रिंस सलमान अब्दुल्लाज़ीज़ की निगरानी में आज रियाद आधुनिक और चमक-दमक से भरपूर शहर बन चुका है, जहां क़रीब 50 लाख लोग रहते हैं.

प्रिंस सलमान बिन अब्दुल्लाज़ीज़ से इस शाही मुलाक़ात के दौरान मुझे बिल्कुल भी ये एहसास नहीं हुआ कि कोई शख़्स मेरे पीछे बैठा हुआ, हमारी बातचीत को नोट कर रहा है. मेरा ये आकलन ग़लत था कि वो प्रिंस अब्दुल्लाज़ीज़ का निजी सचिव या फिर कोई अधिकारी होगा.

मैंने देखा कि वो एक लंबा और मज़बूत कद-काठी वाला इंसान था. जिसकी दाढ़ी करीने से कटी हुई थी. वो सऊदी अरब का पारंपरिक लिबास बिश्ट यानी चोगा पहने हुए था, जिस पर सोने की कशीदाकारी से साफ़ था कि वो किसी ऊंचे दर्ज़े से ताल्लुक़ रखता था. प्रिंस सलमान बिन अब्दुल्लाज़ीज़ से मुलाक़ात के बाद मैंने उस शख़्स को अपना तार्रुफ़ दिया.

हम दोनों ने हाथ मिलाया और मैंने इस ख़ामोशी से नोट लिख रहे शख़्स को ख़ुद का तार्रुफ़ दिया. फिर मैंने उस शख़्स से पूछा कि वो कौन है? उस ने जवाब दिया, “मैं प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हूं. मैं एक वक़ील हूं. आप मेरे पिता से बात कर रहे थे.”

जेद्दा की उस तपती दोपहरी में मुझे ये क़तई अंदाजा नहीं था, कि ये ख़ामोश तबीयत का, कम बोलने वाला 28 बरस का नामालूम इंसान, अरब देशों का सबसे ताक़तवर और इतनी विवादित शख़्सियत बन जाएगा, जैसा इससे पहले अरब मुल्कों में देखा नहीं गया था.

2अक्टूबर को एक बजकर 14 मिनट हो रहे थे, जब जमाल ख़ाशोज्जी तुर्की के इस्तांबुल शहर के लेवेंत इलाक़े की एक साधारण सी दिखने वाली इमारत में दाखिल हुए थे. ख़ाशोज्जी एक जाने-माने लेखक थे और प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के कट्टर आलोचक भी थे. वो इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास गए थे, ताकि अपने तलाक़ के दस्तावेज़ प्रमाणित करा सकें.

लेकिन, एक बार कॉन्सुलेट के अंदर घुसने के बाद ख़ाशोज्जी पर रियाद से भेजी गई सुरक्षा और ख़ुफ़िया अधिकारियों की टीम ने हमला बोला और उन्हें अपने क़ाबू में ले लिया. इन लोगों ने ख़ाशोज्जी की हत्या कर दी. इसके बाद उनके शव को काट कर ऐसे ठिकाने लगाया कि आज तक उसका निशान नहीं मिला.

यमन में चल रही जंग में अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं. इन में से बहुत से लोगों की जान सऊदी अरब के हवाई हमलों में गई. प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सैकड़ों आलोचक सऊदी अरब के क़ैदख़ानों से लापता हो गए. लेकिन, इस एक पत्रकार के क़त्ल ने दुनिया के तमाम लोगों को सऊदी अरब के वली अहद के ख़िलाफ़ कर दिया.

हालांकि आधिकारिक रूप से सऊदी अरब के अधिकारियों ने लगातार इस बात से इनकार किया. लेकिन, कई पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियों का ये यक़ीन था कि मोहम्मद बिन सलमान को ख़ाशोज्जी को ख़ामोश करने के इस ख़ुफ़िया मिशन की पहले से ही ख़बर थी. ख़बरों के मुताबिक़, सीआईए का तो ये मानना है कि ख़ुद प्रिंस सलमान ने ही ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश दिया था.

CBS 60 मिनट पर 29 सितंबर को प्रसारित हुए एक इंटरव्यू में प्रिंस एमबीएस ने जो भी हुआ उसकी ज़िम्मेदारी ली थी. इससे पहले पीबीएस पर एक इंटरव्यू में मोहम्मद बिन सलमान ने ये भी माना था कि जो भी हुआ वो उनकी निगरानी में हुआ. लेकिन, ये ख़ाशोज्जी की हत्या की ज़िम्मेदारी लेना नहीं था. ऐसा लगा कि ख़शोज्जी की हत्या से पैदा हुए विवाद को वो ठंडा करना चाहते हैं.

इस बेहद रहस्यमय हत्या की महत्वपूर्ण कड़ी है, 41 बरस के पूर्व एयरफ़ोर्स अधिकारी सऊद-अल-क़हतानी, जो कभी प्रिंस सलमान के क़रीबी सलाहकारों में से एक थे. ख़ाशोज्जी की हत्या के फ़ौरन बाद सऊद-अल-क़हतानी को बादशाह सलमान के कहने पर बर्ख़ास्त कर दिया गया था. लेकिन, इस बर्ख़ास्तगी से पहले तक सऊदी अरब के शाही दरबार में वो युवराज एमबीएस के सबसे करीबी फ़रमाबरदार थे.

कहा जाता है कि सऊद-अल-क़हतानी ने सऊदी अरब के आम लोगों की साइबर निगरानी का दायरा बढ़ाने में बहुत अहम रोल निभाया है. सिर्फ़ देश ही नहीं, विदेशों में भी सऊदी नागरिकों की साइबर जासूसी की जाती है. इसके लिए लोगों की प्राइवेसी में दख़ल देने वाले सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है.

कुछ ख़बरें तो ये भी कहती हैं कि सऊदी अरब के नागरिकों के मोबाइल फ़ोन को ही जासूसी उपकरण में तब्दील कर दिया गया है. और ये सब मोबाइल इस्तेमाल करने वालों की जानकारी या इजाज़त के बग़ैर किया गया. प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नीतियों की आलोचना या विरोध करने वालों को सोशल मीडिया गाली-गलौज और धमकी भरे मैसेज का हमला झेलना पड़ता है.

अल-क़हतानी के ट्विटर पर क़रीब दस लाख फॉलोवर हैं. क़हतानी ने सोशल मीडिया पर अपनी इस पहुंच का फ़ायदा उठाकर ‘मक्खियों की फ़ौज’ तैयार कर ली है. जो किसी भी इंसान को दुश्मन होने के शक में परेशान करते हैं और सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करते हैं.

साल 2017 की गर्मियां आते-आते सऊदी अरब के ब्लॉगर्स, लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए मुहिम चलाने वाले, मानव अधिकार कार्यकर्ता और प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की आलोचना करने वाले लोग जेल में ठूंसे जा रहे थे. ऐसे माहौल में जमाल ख़ाशोज्जी को भी ये एहसास हो रहा था कि उन्हें ख़तरा हो सकता है.

जून 2017 में जब प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस या सऊदी अरब का वली अहद मुक़र्रर किया गया, तो ख़ाशोज्जी ने सऊदी अरब छोड़ने का फ़ैसला किया और उन्होंने अमरीका में पनाह ली.
59 बरस के जमाल ख़ाशोज्जी हमेशा ख़ुद को देशभक्त सऊदी नागरिक कहते थे.

2000 के दशक की शुरुआत में ख़ाशोज्जी लंदन में सऊदी अऱब के राजदूत के मीडिया सलाहकार हुआ करते थे. उस दौर में मैं अक्सर उनके साथ कॉफ़ी पर गप-शप किया करता था. लेकिन, अमरीका जाने के बाद ख़ाशोज्जी वॉशिंगटन पोस्ट में लगातार प्रिंस सलमान के तानाशाही रवैये के ख़िलाफ़ लेख लिखने लगे थे.

कहा जाता है कि ख़ाशोज्जी के लगातार हमलों से प्रिंस सलमान नाराज़ हो गए थे. इसके बाद पत्रकार ख़ाशोज्जी को सऊदी अरब से फ़ोन जाने लगे कि वो सऊदी अरब लौट आएं. उनसे वादा किया जाता था कि उनकी हिफ़ाज़त की पूरी गारंटी दी जाएगी और सरकार में नौकरी भी मिलेगी.

ख़ाशोज्जी को इन वादों पर बिलकुल ऐतबार नहीं था. उन्होंने अपने दोस्तों को बताया कि अल-क़हतानी की टीम ने उनके ई-मेल और टेक्स्ट मैसेज को हैक कर लिया था और वो सऊदी हुकूमत के दूसरे आलोचकों के साथ उनकी बातचीत पढ़ लेते थे. ख़ाशोज्जी और उनके जैसी सोच वाले लोगों ने अरब देशों में बोलने की आज़ादी का आंदोलन छेड़ने की योजना बनाई हुई थी.

ट्विटर पर उनके 16 लाख फॉलोवर थे. वो मध्य-पूर्व के प्रसिद्ध पत्रकारों में से एक थे. युवराज मोहम्मद बिन सलमान और उनके क़रीबी सलाहकारों की नज़र में ख़ाशोज्जी उनकी हुकूमत के लिए बड़ा ख़तरा थे. हालांकि मोहम्मद बिन सलमान ने सीबीएस पर अपने इंटरव्यू में इस बात से भी इनकार किया था.

香港示威:商场示威、催泪弹衬出烽烟四起的圣诞节

香港周二(24日)度过了不平常的平安夜,示威者发起在多区的商场抗议,再次演变成警民冲突,在圣诞装饰的背景下,出现催泪弹和汽油弹。

往年的圣诞节是市民消费意愿高涨的时期,但今年市面庆祝气氛比往年淡静,多区商场因有警民冲突而需要提早关门。

政府发言人在24日晚表示,严厉谴责“蒙面暴徒”在平安夜晚上在多区非法集结。声明说,“暴徒破坏交通灯、设伞阵、堵路、破坏商场店铺、纵火,甚至冲击警务人员。这些行为严重扰乱社会秩序,影响市民欢度佳节,破坏节日气氛,实在令人愤慨。”

另外,发言人特别提到,有人在尖沙咀挥动港独旗帜,强调提倡香港独立,不符合香港在《基本法》下的宪制及法律地位、不符合香港社会的整体和长远利益,亦与国家对香港既定的基本方针政策相抵触。

在冲突发生前,警方已在多区布防。当市民一家大小在街上欣赏灯饰感受节日气氛时,附近有防暴警察或警车戒备,让这天的节日气氛多了一份紧张感。

许多餐厅明显较往年少了订座和生意,但“龙门冰室”等黄店食肆门外仍然大排长龙

警务处处长邓炳强在当晚高调在尖沙咀见记者,感谢前线警员,并希望“黑衣暴徒”不要破坏商店、纵火和恐吓市民,让大家有真正平安的平安夜。

有市民原本申请晚上在尖沙咀游行,但在日前宣布取消,仍然吸引大批市民在尖沙咀钟楼一带聚集游行,他们高举手机亮灯,高叫口号和唱示威歌曲。

其后参与游行部分人走出马路,防暴警察到场与示威者对峙,警方在半岛酒店附近施放了当晚首枚催泪弹。

示威者转到另一处以杂物堵路,警方发射多枚催泪弹、橡胶子弹、胡椒球弹,并出动水炮车驱赶。示威者和身穿圣诞装束的途人争相走避,成为了今年圣诞香港独有的画面。

警方在社交媒体表示,有人一度向尖沙咀警署投掷汽油弹。

在旺角,示威者和警方先在朗豪坊商场内对峙,后来扩散至附近街道。多个旺角地铁站出入口遭纵火。

该区的汇丰银行被示威者破坏和纵火,喷上“星火之仇”、“星星之火可以燎原”等涂鸦

汇丰银行因为早前关闭香港示威者众筹平台“星火同盟”的帐户,而成为被“装修”的新目标。

汇丰表示,对于分行遭受破坏深表遗憾,明白公众对事件关注,有关账户的交易活动与开户时所陈述的用途并不相符,银行按照客户的指示处理账户余额后,在11月将账户关闭,到本月收到执法机构的执行通知。

汇丰指,作为一家国际银行,是按照国际监管标准作出关闭账户的决定,银行会继续如常运作。

警方早前宣布以“洗黑钱”之名,拘捕“星火同盟”的成员,并指会向法庭申请冻结户口内约7000万港元。星火同盟批评警方说法失实,是警方“意图抹黑”。

旺角示威持续至午夜,示威者向警车投掷汽油弹,数名相信是持不同政见的人士遭示威者“私了”,需要送院治理。

在元朗,有人在商场破坏食肆,警方进入商场搜捕示威者期间,一名男子怀疑为了避开警员追捕,从二楼跳到一楼后受伤送院。警方表示,该名男子涉嫌袭警被捕。

在沙田,约200至300名市民在新城市广场聚集,高叫口号。根据香港媒体报道,数名戴口罩的疑似警员被市民包围和指骂,其后,警方出动大批防暴警员及身穿黑衣的便衣警察到场驱散市民。

港岛区,几十名示威者原本在铜锣湾聚集,之后他们在行人路试图步行到中环,其间高叫口号,在步行到湾仔警署时,遭防暴警察截查,被悉数带到警署。

香港周二(24日)度过了不平常的平安夜,示威者发起在多区的商场抗议,再次演变成警民冲突,在圣诞装饰的背景下,出现催泪弹和汽油弹。

往年的圣诞节是市民消费意愿高涨的时期,但今年市面庆祝气氛比往年淡静,多区商场因有警民冲突而需要提早关门。

政府发言人在24日晚表示,严厉谴责“蒙面暴徒”在平安夜晚上在多区非法集结。声明说,“暴徒破坏交通灯、设伞阵、堵路、破坏商场店铺、纵火,甚至冲击警务人员。这些行为严重扰乱社会秩序,影响市民欢度佳节,破坏节日气氛,实在令人愤慨。”

另外,发言人特别提到,有人在尖沙咀挥动港独旗帜,强调提倡香港独立,不符合香港在《基本法》下的宪制及法律地位、不符合香港社会的整体和长远利益,亦与国家对香港既定的基本方针政策相抵触。

在冲突发生前,警方已在多区布防。当市民一家大小在街上欣赏灯饰感受节日气氛时,附近有防暴警察或警车戒备,让这天的节日气氛多了一份紧张感。

许多餐厅明显较往年少了订座和生意,但“龙门冰室”等黄店食肆门外仍然大排长龙。

警务处处长邓炳强在当晚高调在尖沙咀见记者,感谢前线警员,并希望“黑衣暴徒”不要破坏商店、纵火和恐吓市民,让大家有真正平安的平安夜。

有市民原本申请晚上在尖沙咀游行,但在日前宣布取消,仍然吸引大批市民在尖沙咀钟楼一带集游行,他们高举手机亮灯,高叫口号和唱示威歌曲。

其后参与游行部分人走出马路,防暴警察到场与示威者对峙,警方在半岛酒店附近施放了当晚首枚催泪弹。

示威者转到另一处以杂物堵路,警方发射多枚催泪弹、橡胶子弹、胡椒球弹,并出动水炮车驱赶。示威者和身穿圣诞装束的途人争相走避,成为了今年圣诞香港独有的画面。

警方在社交媒体表示,有人一度向尖沙咀警署投掷汽油弹。

在旺角,示威者和警方先在朗豪坊商场内对峙,后来扩散至附近街道。多个旺角地铁站出入口遭纵火。

该区的汇丰银行被示威者破坏和纵火,喷上“星火之仇”、“星星之火可以燎原”等涂鸦

汇丰银行因为早前关闭香港示威者众筹平台“星火同盟”的帐户,而成为被“装修”的新目标。

汇丰表示,对于分行遭受破坏深表遗憾,明白公众对事件关注,有关账户的交易活动与开户时所陈述的用途并不相符,银行按照客户的指示处理账户余额后,在11月将账户关闭,到本月收到执法机构的执行通知。

汇丰指,作为一家国际银行,是按照国际监管标准作出关闭账户的决定,银行会继续如常运作。

警方早前宣布以“洗黑钱”之名,拘捕“星火同盟”的成员,并指会向法庭申请冻结户口内约7000万港元。星火同盟批评警方说法失实,是警方“意图抹黑”

旺角示威持续至午夜,示威者向警车投掷汽油弹,数名相信是持不同政见的人士遭示威者“私了”,需要送院治理。

在元朗,有人在商场破坏食肆,警方进入商场搜捕示威者期间,一名男子怀疑为了避开警员追捕,从二楼跳到一楼后受伤送院。警方表示,该名男子涉嫌袭警被捕。

在沙田,约200至300名市民在新城市广场聚集,高叫口号。根据香港媒体报道,数名戴口罩的疑似警员被市民包围和指骂,其后,警方出动大批防暴警员及身穿黑衣的便衣警察到场驱散市民。

港岛区,几十名示威者原本在铜锣湾聚集,之后他们在行人路试图步行到中环,其间高叫口号,在步行到湾仔警署时,遭防暴警察截查,被悉数带到警署。

नागरिकता संशोधन क़ानून को वापस लेना पड़ेगा नहीं तो बीजेपी को जाना पड़ेगाः ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में न केवल केंद्र की बीजेपी की सरकार बल्कि प्रधानमंत्री को भी निशाने पर लिया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा कि कैब को मिड नाइट में पास करा कर क़ानून बना दिया. लेकिन सीएबी इतना अच्छा है तो प्रधानमंत्री आपने वोट क्यों नहीं डाला.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

ममता बोलीं, “प्रधानमंत्री संसद में थे लेकिन वोट नहीं डाले तो इसका मतलब ये है कि आप भी इसे सपोर्ट नहीं करते. अगर नहीं सपोर्ट करते तो इसको ख़ारिज कर दीजिए.”मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

ममता ने बीजेपी सरकार पर मूलभूत बातों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा, “प्याज़ का भाव दो सौ रुपये है, बेरोज़गारी बढ़ रहा है, इंडस्ट्री बंद हो रहे हैं, रुपये की कीमत गिर रही है… लेकिन सरकार सबको छुपाने के लिए एक बिल लेकर आ गई है. जो भी इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहा है उसे वो देशद्रोही बोल दे रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

ममता ने कहा कि आज़ादी के समय बीजेपी नहीं थी फिर वो कैसे यह तय कर सकती है कि कौन देश का नागरिक रहेगा और कौन नहीं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा, “आप आज़ादी के आंदोलन में नहीं थे, आपकी पार्टी का जन्म 1980 में हुआ था. आप गांधी, नेहरू, पटेल, आज़ाद, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस के साथ नहीं थे. आप पांच साल सत्ता में रहने के बाद यह तय करेंगे कि कौन नागरिक रहेगा और कौन नहीं…मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

“एक नागरिक के तौर पर हम पूछें कि आप कौन हैं हमें हमारी मां का जन्मप्रमाण पत्र देना पड़ा तो आपको भी देना पड़ेगा. आप यह तय कर लें कि आपके पास सब प्रमाणपत्र हैं या नहीं? हम हमारी मां का प्रमाणपत्र नहीं दे सकेंगे. क्या हम गुजरात, यूपी में छानबीन करें? त्रिपुरा में नहीं करोगे, आपकी सरकार है. असम में कुछ बोलते हैं, कुछ और करते हैं. पूर्वोत्तर राज्य, बिहार, दिल्ली, यूपी सब जल रहा है. कभी लट्टू, कबड्डी, फ़ुटबॉल नहीं खेला और बीजेपी बड़ा खिलाड़ी बन गई. बीजेपी को कोई नहीं चाहता है. 38 फ़ीसदी वोट मिला, 62 फ़ीसदी ख़िलाफ़ है.”मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

ममता ने कहा, “हम क्या खाना खाएंगे यह भी बीजेपी तय कर रही है. एयर इंडिया में आज से पहले कभी ऐसा नहीं था, अब सिर्फ़ शाकाहारी खाना मिलता है.”मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा कि, “अब वक्त आ गया है, हिंदुस्तान का लोकतंत्र मजबूत है, मजबूर नहीं. हिंदुस्तान रहेगा, हर आदमी एक साथ काम करेगा. अगर हिंदुस्तान का हर प्रांत एक साथ हो जाए बीजेपी कितने लोगों को जेल में भरेगी. यूपी में जब कल किसी की गोली में मौत हो गई तो यूपी के मुख्यमंत्री बोलते हैं कि और गोली मारना चाहिए. इन्हें शर्म नहीं है.”मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

“हमारे इतिहासकार रामचंद्र गुहा गांधी की तस्वीर लेकर निकले थे, उनकी बेइज्ज़ती की गई. इनको शर्म नहीं आती.”मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

अटल बिहारी वाजपेयी राजधर्म की बात करते थे. आप देश की सत्ता पर बैठे हैं और देश में आग लग रही है. आज राजधर्म का पालन नहीं करने वाले सत्ता में हैं. ये कहते हैं, सबको हटा देंगे, सबको गोली मार देंगे. कितने लोगों को गोली मारेंगे? अगर इस आंदोलन के लिए कोई अन्याय हमने किया है तो आप हमें गोली मारें, आम लोगों को नहीं. हम एक साथ रहते हैं, एक साथ पर्व त्योहार मनाते हैं, उठते बैठते हैं.”मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

“देश की आज़ादी के वक्त गांधी जी ने हिंदू-मुसलमानों को शांत किया था. ये लोग डराते हैं, देश को जलाते हैं, बदनाम करते हैं, देश को अशांत करते हैं, एक फेंकू नेटवर्क बनाया गया है. उसमें बहुत रुपए देकर ग़लत वीडियो बनाते हैं, आपको उकसाते हैं. वो चाहते हैं कि एक धर्म को अलग से बना दो. हम नहीं होने देंगे. बीजेपी समझो, हमारा कोई भाई बहन अलग नहीं है. हम एक साथ लड़ेंगे, कामयाब होंगे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

अंत में ममता ने कहा कि अगर बीजेपी ने नागरिकता संशोधन क़ानून को वापस नहीं लिया तो उसे जाना पड़ेगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा, “आप हमसे पूछते हैं कि हम देश के सिटीजन हैं या नहीं, हम आपसे पूछते हैं कि क्या आप देश के सिटीजन बनने लायक भी हैं क्या? हम हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, हर धर्म का सम्मान करते हैं. नो कैब, नो क़ा, नो एनआरसी… नागरिकता संशोधन क़ानून को वापस लेना पड़ेगा नहीं तो बीजेपी को वापस जाना पड़ेगा.” मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

राज कपूर की वो रूसी हीरोइन अब कहां हैं?

जब मैंने रूसी अभिनेत्री और मशहूर बैले डांसर सेनिया रेबेंकीना से पूछा कि क्या आप हिंदी में कुछ बोल सकती हैं तो उन्होंने जवाब में ये लाइन कही.

सेनिया, राज कपूर की 1970 में आई मशहूर फ़िल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में काम कर चुकी हैं. फ़िल्म में उन्होंने सर्कस में काम करने वाली एक डांसर का किरदार अदा किया है जिसे राजू (राज कपूर) से इश्क़ हो जाता है.

14 दिसंबर को राज कपूर का 95वां जन्मदिन है. ऐसे में मैंने कुछ दिनों पहले सोचा कि अगर सेनिया से राज कपूर के बारे में और उनके साथ काम करने के अनुभव के बारे में बात की जाए तो ये काफ़ी दिलचस्प रहेगा.

मगर उनके बारे में पता लगाना ख़ासा मुश्किल साबित होने वाला था.

वो अब कहां हैं क्या करती हैं और मुझसे बात करना चाहेंगी भी या नहीं, क्योंकि ‘मेरा नाम जोकर’ में चर्चित भूमिका के बावजूद सेनिया हिंदी फ़िल्मों से ग़ायब ही हो गईं.

मैंने कपूर परिवार से भी संपर्क साधने की कोशिश की और उनके बेटे और मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर से जानना चाहा कि क्या वो सेनिया के संपर्क में हैं लेकिन ऋषि कपूर ने जवाब दिया कि फ़िलहाल उनके पास सेनिया से जुड़ी कोई जानकारी नहीं है.

तब मैंने बीबीसी रूसी सेवा से संपर्क साधा और उन्होंने आख़िर सेनिया का नंबर खोज निकाला. मैंने थोड़ा झिझकते हुए उनको फ़ोन पर मैसेज किया कि क्या वो हमसे राज कपूर के बारे में बात करना चाहेंगी.

मैसेज भेजने के सिर्फ़ आधा घंटे के अंदर ही उनका जवाब आ गया, “मुझे राज कपूर के बारे में बात करने पर बेहद ख़ुशी होगी. लेकिन फ़िलहाल मैं इटली में हूं और छुट्टियां मना रही हूं. आप मुझे 3-4 दिन बाद फ़ोन कर सकते हैं तब तक मैं मास्को लौट जाऊंगी और इत्मीनान से आपसे बात करूंगी.”

मैंने हफ़्ते भर बाद उनको फ़ोन मिलाया तो उन्होंने मुझसे काफ़ी टूटी-फ़ूटी अंग्रेज़ी में बात करते हुए कहा, “देखिए मेरी अंग्रेज़ी बहुत ख़राब है. मैं आपसे कैसे बात कर पाऊंगी? मैं तो रूसी भाषा बोलती हूं.”

मैंने जवाब दिया कि आप कम से कम ख़राब अंग्रेज़ी बोल तो लेती हैं लेकिन मैं तो रूसी भाषा का एक शब्द भी नहीं बोल सकता तो मजबूरन मुझे आपसे अंग्रेज़ी में ही बात करनी पड़ेगी.

मैंने उनको टूटी-फूटी अंग्रेज़ी बोलने की छूट दे दी जिसे उन्होंने ख़ुशी-ख़ुशी कबूल कर लिया और हमारी बातें चालू हो गईं.

सेनिया फ़िलहाल अपने वतन रूस में ही रहती हैं और 74 साल की उम्र में भी बैले डांसिग के अपने शौक को उन्होंने ज़िंदा रखा है.

सेनिया ने बताया कि वो तब 24-25 साल की थीं जब राज कपूर से उनकी पहली मुलाक़ात हुई. राज कपूर ‘मेरा नाम जोकर’ की तैयारियां कर रहे थे और मॉस्को आए हुए थे. एक शाम उन्होंने सेनिया का बैले डांस देखा और उनसे ख़ासे प्रभावित हुए.

उन्होंने सेनिया को अपनी फ़िल्म में काम करने का प्रस्ताव दिया. सेनिया राज कपूर के नाम से वाक़िफ़ थीं क्योंकि उनकी फ़िल्में ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ रूस में बहुत मशहूर रही थीं और उनके गाने रूसी लोग गुनगुनाते रहते थे.

हालांकि फ़िल्म में उनका ज़्यादा बड़ा रोल नहीं था लेकिन वो इस अनुभव को यादगार मानती हैं. वो कहती हैं, “सेट पर राज कपूर सबका बड़ा ध्यान रखते थे. उनके सेट पर चाहे बड़ा कलाकार हो या कोई जूनियर. सबको एक सा ट्रीटमेंट मिलता था. लेकिन एक बार कैमरा चालू हो जाने पर वो बड़े कठोर हो जाते और जब तक कोई बेस्ट शॉट ना दे दे, संतुष्ट नहीं होते थे.”

सेनिया बताती हैं कि रूस में अब के युवा ज़रूर हॉलीवुड फ़िल्में ही ज़्यादा देखते हैं लेकिन 60 और 70 के दशक में राज कपूर रूस में एक बहुत बड़ा नाम थे और उनकी फ़िल्में वहां बहुत हिट होती थीं.

सेनिया ‘मेरा नाम जोकर‘ की शूटिंग के बाद रूस तो चली गईं और बैले डांसिग में अपने करियर को जारी रखा. वो राज कपूर और उनके परिवार के संपर्क में भी रहीं.

वो बताती हैं कि जब भी वो भारत आतीं तो राज कपूर के परिवार से ज़रूर मिलतीं. वो कपूर परिवार की मेज़बानी की बहुत तारीफ़ करती हैं.

साल 1988 में जब राज कपूर की मौत का समाचार उन्हें मिला तो उन्हें बड़ा धक्का लगा था.

सेनिया बताती हैं कि राज कपूर की मौत के बाद भी वो कई फ़िल्म समारोहों में हिस्सा लेने जब भी भारत आतीं तो राज कपूर के बेटों रणधीर, ऋषि और राजीव कपूर से उनकी मुलाक़ात होती.

‘मेरा नाम जोकर’ के 39 सालों बाद साल 2009 में उनके बेटे ऋषि कपूर की फ़िल्म ‘चिंटू जी’ में सेनिया रेबेंकीना ने एक छोटी सी भूमिका अदा की थी.

JNU के छात्रों का भारी प्रदर्शन, बढ़ी फ़ीस से नाराज़ हैं छात्र

सोमवार को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के साथ-साथ ही हज़ारों की तादाद में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. ये छात्र बढ़ी हुई फ़ीस और यूनिवर्सिटी में लागू हुए ड्रेस कोड के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.

प्रदर्शन कर रहे छात्र अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की ओर बढ़ रहे थे लेकिन गेटों पर बैरियर से वे समारोह स्थल तक नहीं पहुंच सके. उप-राष्ट्रपति वेकैंया नायडू इस दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक़ इस वक़्त प्रदर्शन कर रहे छात्रों को रोकने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात है, जिनके हाथों में लाठियां है.

यूनिवर्सिटी के नए नियमों के मुताबिक़ हॉस्टल फ़ीस में भारी भरकम बदलाव किया गया है. प्रशासन का कहना है कि पिछले 14 सालों से हॉस्टल के फ़ीस स्ट्रक्चर में बदलाव नहीं किया गया था.
पहले डबल सीटर कमरे का किराया 10 रुपये थी जिसे बढ़ा कर 300 रुपये प्रति माह किया गया. वहीं सिंगल सीटर कमरे का किराया 20 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये रखा गया है.
वन टाइम मेस सेक्टोरिटी फ़ीस 5500 रुपये से बढ़ा कर 12000 रुपये कर दिया गया है.
रात 11 बजे या अधिकतम 11.30 बजे के बाद छात्रों को अपने हॉस्टल के भीतर रहना होगा और बाहर नहीं निकल सकेंगे. अगर कोई अपने हॉस्टल के अलावा किसी अन्य हॉस्टल या कैंपस में पाया जाता है तो उसे हॉस्टल से निकाला जाएगा.
इसके अलावा नए मैनुअल में ये भी लिखा गया है कि लोगों को डाइनिंग हॉल में ”उचित कपड़े” पहन कर आना होगा. छात्रों का पूछना है कि ‘उचित कपड़े’ की परिभाषा क्या है. हालांकि विश्व विद्यालय प्रशासन का कहना है कि ये नियम पहले से जारी था. इसे केवल दोहराया गया है बदलाव नहीं किया गया.
छात्र संघ इस ड्रॉफ्ट को वापस लेने की मांग कर रहा है.

एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि हम पिछले 15 दिनों से फ़ीस वृद्धि का विरोध कर रहे हैं. कम से कम 40 फ़ीसदी छात्र ग़रीब परिवार से आते हैं, वो छात्र यहां कैसे पढ़ेंगे? ‘

एक लड़की ने कहा, ”हम अपने ग़रीब छात्रों के लिए लड़ रहे हैं. वीसी और रेक्टर जिनकी ज़िम्मेदारी है कि वो छात्रों से संवाद करें वो बात ही नहीं करते. तीन सालों से उन्होंने छात्र ईकाई से बात नहीं की है.”

एक अन्य छात्र ने कहा, ”यहां बेरहमी से छात्रों को नियंत्रित किया जा रहा है. हमारे शरीर पर खरोचें हैं. हमारे वीसी हमसे कैंपस में तो मिलते नहीं हैं लेकिन यहां दीक्षांत समारोह में वो ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि जेएनयू में सबकुछ बहुत अच्छा है. हम इसलिए यहां उनसे मिलकर अपनी बात रखने आए हैं. हमारी आसान सी मांगे हैं आप यूनिवर्सिटी में नहीं मिलते तो जहां मिलेंगे वहीं हम अपनी बात रखने आए हैं.”

气候变化:科学家警告全球面临气候危机

最新一项研究指出,全球正面临气候危机。超过11000名科学家认可这项研究。

这项研究基于40年来的数据,指各国政府都未能解决气候危机。没有持续深层次的改变,全球将面临难以言说的人类苦难。

卫星数据显示,上个月是有记录以来最热的10月。而这项新研究称,仅仅测量全球表层温度不足以描述全球过热的真正危险。所以研究者们囊括了一系列数据,他们认为这些代表了过去40年气候变化的一系列重要指征。

这些指征包括人类和动物数量的增长、人均肉类产量、全球树木覆盖面积的减少及化石燃料消耗。

但一些领域也有进步。例如,可再生能源显著增加,风能和太阳能的消耗量每10年增长373%,但仍比2018年化石燃料使用量少28倍。

研究人员表示,这些重要的指标都在朝着错误方向发展,并导致气候出现危机

主要研究者、悉尼大学学者纽瑟姆(Thomas Newsome)称:“危机意味着,如果我们不通过减少碳排放、牲畜产量、土地开发和化石燃料消耗等方式来应对气候变化,其影响可能会比我们迄今所经历的更严重。”

这项研究呼应了包括政府间气候变化专门委员会内的科学家此前警告。研究者呈现了清晰简单的图像,里面有更多指标,可以让公众和政府明白,应对不力威胁极大。

这份报告的不同之处在于,虽然情况糟糕,但并非毫无希望。研究人员指出应该立即在六个领域采取行动,或许能产生重大影响。

来自153个国家的大约11000名科学家赞同这项研究,所有细节都已经在网上公布。

纽瑟姆称:“我们的排放不断增长,温度一直在升高,我们知道这些已经40年了,但还未采取行动。不需要很聪明你就应该知道,这是一个问题。”

由于多次气候会议都未产出有意义的行动,研究人员感到厌烦。但他们认为,日益增长的全球抗议带来了希望。

“最近全球关注增加,我们深受鼓舞。政府们在制定新政策,学生罢课,诉讼在进行,草根公民运动在要求改变。”

香港抗议、中美贸易战、赵紫阳骨灰安葬和本周更多好故事

2019年10月第三周,香港的抗议活动持续,地铁站、银行等成为示威者针对的新目标。同时,香港特首林郑月娥发表新一份《施政报告》。另外,由香港示威引发的全美职业篮球联赛(NBA)与中国之间的对垒战事未平,硝烟再起。在大陆,中国要求数万名记者参加“习思想”在线考试。前中共中央总书记赵紫阳夫妇的骨灰合葬于北京昌平区民间公墓天寿园。中美贸易方面,两国“第一阶段”协议可能继续商定细节。

刚刚过去的一周,BBC中文以下新闻内容受到读者的关注。如果你错过了它们,BBC中文带你一一回顾。

香港“反送中”抗议暴力升级,示威者从破坏政府部门、立法会与警署,转移到破坏地铁站、银行,以及被指“亲中”的食肆和店铺,“吉野家”、“星巴克”、“元气寿司”、“一芳水果茶”等耳熟能详的品牌,成为抗议者针对的对象。

11月前,中国数以万计的记者将正式参加一场全国性的在线考试,以测试他们对中共政策的了解度及对习近平主席的忠诚度。不参加考试或没有考过的记者将无法换发新的记者证。

美国彭博社周一(10月14日)报道称,在签署特朗普所称“相当实质性的第一阶段协议”前,中方本月欲继续谈判商定细节。

该媒体引述一名知情人士的话称,北京可能派中国的最高谈判代表、国务院副总理刘鹤再次前往华盛顿完成最终的协议内容,让中美两国元首在下月于智利举行的亚太经合组织峰会上签署。另一名知情人士则表示,中方还希望特朗普取消将于12月开始征收的额外关税。

由香港示威引发的NBA与中国之间的一场对垒战事未平硝烟再起。美国职业男篮顶尖球星勒布朗·詹姆斯就“莫雷事件”发声惹来一片批评。

10月18日下午1時,前中共中央总书记赵紫阳在逝世14年后,与夫人的骨灰合葬于北京昌平区民间公墓天寿园。赵家子女在经历多年波折后,终于在父亲百岁冥诞之时,遵循了中国“入土为安”的传统。在此之前,赵的骨灰一直放置在他北京的故居。

弹劾特朗普:特朗普与乌克兰总统通话记录显示了什么

美国总统特朗普的乌克兰“电话门”争议继续延烧。舆论压力下美国政府周三(9月25日)公布了特朗普与乌克兰总统7月的通话记录。通话记录显示,特朗普确实要求乌克兰领导人调查美国前副总统拜登的儿子。

民主党总统竞选人拜登是特朗普在2020年美国总统大选中的主要竞争对手。民主党指控特朗普寻求外国帮助来抹黑竞争对手。

美国宪法规定,总统因叛国、贿赂或其它重罪和轻罪,被弹劾而判罪者,均应免职。

7月,特朗普曾冻结对乌克兰的军事援助,但他坚称,这并不是对乌克兰新政府施压。

检举人举报特朗普的文件周三已经提交到美国众议院议员处。众议院民主党议员亚当·希夫(Adam Schiff)称:“我发现控告让人忧心,而且十分可信。”

白宫披露的是7月25日特朗普与乌克兰总统泽伦斯基(Volodymyr Zelensky)的通话记录。根据记录,他们谈到了早期被撤职的乌克兰检察官绍金(Viktor Shokin)。

在这场半个小时的通话中,特朗普说:“我听说你有一个很优秀的检察官,但他被解雇了,这不公平。”

特朗普还说:“还有一件事,关于拜登儿子的讨论很多,说拜登阻止了(对其儿子)起诉,但许多人想知道真相,所以无论你和司法部长能做些什么都会很棒。”

根据通话记录,特朗普在电话中要求泽伦斯基与美国司法部长威廉·巴尔(William Barr)及特朗普的私人律师合作调查。

美国司法部周三表示,特朗普并未与司法部长谈到乌克兰调查拜登的事情,巴尔也未联络过乌克兰。

特朗普一直在关注拜登如何游说乌克兰解雇绍金。

绍金曾对天然气公司布瑞斯玛(Burisma)展开调查,拜登的儿子亨特·拜登曾担任该公司董事会成员。

但目前并未有证据显示拜登父子有任何不当行为。

特朗普曾承诺,会公布7月25日通话“完整、完全解密和未经编辑的文本”。但白宫周三上午披露的是美国官员整理的交谈记录。

Чиновники раскрыли секрет закупки дождевиков

Почти 21 тысячу дождевиков закупили столичные государственные учреждения. Представители Департамента города Москвы по конкурентной политике рассказали, какой месяц стал самым урожайным на «дождевые контракты» и какие ведомства чаще всего покупают защиту от осадков.

Как пояснили «МК» в пресс-службе департамента, всего с начала этого года на поставку дождевиков было заключено 14 контрактов. Больше всего заказов пришлось на апрель, их количество достигло 6, в марте и мае было заключено по 3 контракта, летом — всего 2. А если прослеживать ежегодную статистику, то большее количество заключенных контрактов приходится на первые кварталы, постепенно сходя на нет к концу года. Тем не менее в этом сентябре все еще может измениться. Чаще всего приобретают дождевики заказчики из городских служб.

Самыми активными оказались районные ГБУ «Жилищник», но первое место все равно ушло ВДНХ. Далее в топе ГБУ «Жилищники» районов Нагатинский затон, Можайского района, Сокольников и Перово. Следом идет научно-практический центр экстренной медицинской помощи Депздрава и школа № 1794.

Дождевики в большинстве своем «тканевые влагозащитные с капюшоном», кроме того пользуются популярностью у городских учреждений «плащи-дождевики на молнии с тканевым кантом» и «дождевик-плащ Гром».

Сама Иванка пока никак не отреагировала на критику. В Instagram она разместила фото и видео с мероприятий, выбрав, однако, те, на которых ее внешний вид не столь откровенен.

Дочь президента США Дональда Трампа Иванка была уличена в том, что появилась на Генассамблее ООН без нижнего белья. Фото с мероприятия она выложила в своем Instagram.

Подписчики удивились увиденному. Многие отметили, что видят на фото соски Трамп. «Вы видите то, что вижу я?» – отметил один из подписчиков. В целом пользователи выразили восхищение внешним обликом дочери американского президента.

五大诉求之“双普选”:香港与北京难以弥合的鸿沟

2019年,由香港政府推动《逃犯条例》修订引发的香港示威浪潮从夏天持续到秋天。尽管香港特首林郑月娥已经正式宣布撤回条例修订,满足示威者的一个诉求。但“五大诉求,缺一不可”呼声仍不绝于耳。

无条件释放被捕示威者、成立独立调查委员会调查警民冲突、取消对抗议者“暴动”的定性、尽快实现立法会与行政长官选举的“双普选”,余下的这四个诉求中,“双普选”无疑是分量最重的一个。

不论香港主权移交前后,普选问题一直是讨论香港民主时绕不开的议题。同时这个问题也成为不断撕裂的中港关系的缩影。因“反送中”引发的示威抗议再一次令“双普选”问题成为焦点。

香港政府多次表示,“一人一票”普选行政长官与立法会全部议员是《基本法》确立的最终目标。但其中有诸多限定条件。

《基本法》虽然列明“双普选”的最终目标,但没有阐明“有广泛代表性的提名委员会”的含义,给之后的一系列争议埋下伏笔。

主权移交22年来,现任行政长官林郑月娥由来自不同界别的1200人组成的选举委员会选举产生,立法会议员选举半数席位为一般选民选举直接选举产生,另外一半席位称作“功能组别”,“功能组别”的选民需为商界、金融界等各行业代表,许多组别常年被亲北京的建制派控制。不论是选出行政长官的选举委员会,还是“功能界别”立法会议员,泛民阵营均认为,这些席位都缺乏全体香港选民的直接参与,不能广泛代表香港的民意,因而常常招致民主派人士批评,斥之为“假普选”。

引起今夏风波的《逃犯条例》修订便是一个很好的例子。今年2月香港政府提议修订《逃犯条例》,即便在6月9日主办方宣布有100万人参与的大型示威发生后反对此举,香港政府仍坚持推动法案的二读。

“现在越来越多人知道,行政长官一个比一个差,原因是行政长官都是北京选定的,他们不对香港人民负责,”美国圣母大学政治学系副教授许田波说。“香港人想要的特首是一个可以真正把香港人想法告诉北京的人,而不是一直只会把北京的意志灌输到香港的人。”